तेरे दीदार की तलब रखता था

तेरे दीदार की तलब रखता था
तुझसे प्यार की चाहत रखता था
तुझसे इजहार की सदा रखता था
रख ना पाया तो सिर्फ इजहार ए जूनून !

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इजहार मोहब्बत का कुछ ऐसे हुआ
क्या कहे की प्यार कैसे हुआ
उनकी इक झलक पे निसार हुआ हम
सादगी पे मर मिटे और आँखों से इकरार हुआ
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